Delhi Samachar | New Delhi : आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली नगर निगम (MCD) के आयुक्त की वित्तीय शक्तियां 5 करोड़ से बढ़ाकर 50 करोड़ करने का सख्त विरोध किया है। निगम में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने कहा कि भाजपा(BJP) सरकार निगमायुक्त की वित्तीय शक्ति बढ़ाकर नौकरशाही को बढ़ावा दे रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (CM Rekha Gupta) ने स्टैंडिंग कमेटी की भूमिका ही खत्म कर दी है। क्या मुख्यमंत्री को अपने पार्षदों और मेयर पर भरोसा नहीं है? उन्होंने कहा कि अभी तक 5 करोड़ से अधिक वित्तीय मंजूरी के लिए स्टैंडिंग कमेटी और फिर सदन की अनुमति लेनी पड़ती थी। भाजपा बताए कि क्या अब दिल्ली को जनता से चुने गए लोग चलाएंगे या फिर उसके लगाए गए बाबू चलाएंगे?
आयुक्त की वित्तीय शक्तियों को 5 करोड़ से बढ़ाकर 50 करोड़ कर दिया
अंकुश नारंग ने कहा कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता निगम को पंगु बनाना चाहती हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली नगर निगम के आयुक्त की वित्तीय शक्तियों को 5 करोड़ से बढ़ाकर 50 करोड़ कर दिया है। उन्होंने कहा कि निगम एक्ट 1957 के सेक्शन 202, सब-सेक्शन (सी) के तहत कमिश्नर की वित्तीय शक्ति 5 करोड़ रुपये तक थी। इससे ऊपर का कोई भी खर्च करने के लिए उन्हें स्टैंडिंग कमेटी से अनुमति लेनी पड़ती थी और फिर स्टैंडिंग कमेटी उसे सदन में भेजती थी, जहां पार्षदों की मंजूरी के बाद ही वह पास होता था। लेकिन यहां मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सीधे इसे 50 करोड़ कर दिया।
दिल्ली को अफसरशाही यानी बाबुओं के जरिए चलाना चाहती हैं
इसका मतलब है कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को न तो अपने भाजपा के मेयर, न स्टैंडिंग कमेटी, न उसकी चेयरमैन और न ही निगम सदन में भाजपा के बहुमत पर विश्वास है। वे दिल्ली को अफसरशाही यानी बाबुओं के जरिए चलाना चाहती हैं। यह साफ उदाहरण है कि कैसे रेखा गुप्ता लोकतंत्र की हत्या कर रही हैं और दिल्ली में अफसरशाही को बढ़ावा दे रही हैं, जबकि चुने हुए प्रतिनिधियों को सिर्फ शोपीस बनाकर रख दिया है। कोई भी नया नियम लागू होने से पहले निगम एक्ट के अंदर संशोधन होना चाहिए। लेकिन रेखा गुप्ता ने बिना एक्ट में संशोधन किए एक प्रशासनिक आदेश निकालकर कमिश्नर की वित्तीय शक्ति 50 करोड़ कर दी |


