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रूस का बड़ा प्रस्ताव: भारत को सस्ती दरों पर ज्यादा तेल-गैस देने की तैयारी, पश्चिम एशिया संकट के बीच ऊर्जा सुरक्षा पर अहम बातचीत

भारत-रूस ऊर्जा सहयोग एक बार फिर सुर्खियों में है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच रूस ने भारत को कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।

गुरुवार (2 अप्रैल 2026) को नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठकों में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर सहमति जताई


⛽ भारत-रूस ऊर्जा सहयोग पर जोर

बैठकों के दौरान तेल और गैस सेक्टर में सहयोग को प्राथमिकता दी गई। रूस ने संकेत दिया कि उसकी कंपनियां भारतीय बाजार में कच्चे तेल और LNG की आपूर्ति बढ़ाने में सक्षम हैं

यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है।


🌍 पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी चिंता

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

यह जलमार्ग वैश्विक स्तर पर लगभग 20% तेल और LNG परिवहन के लिए अहम माना जाता है।

इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।


📊 भारत के आयात में रूस की हिस्सेदारी

ताजा आंकड़ों के अनुसार:

  • जनवरी 2026 में भारत ने रूस से 1.98 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात किया
  • रूस की हिस्सेदारी घटकर 19.3% रह गई
  • इससे पहले यह हिस्सा
    • नवंबर 2025 में 27.5%
    • मई 2025 में 33% था

हालांकि, फरवरी 2026 के बाद से भारत ने रूस से तेल खरीद फिर बढ़ानी शुरू कर दी है।


🤝 उच्चस्तरीय बैठकों में कई मुद्दों पर चर्चा

रूस के उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने भारत में कई अहम नेताओं से मुलाकात की, जिनमें:

  • राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल
  • विदेश मंत्री एस. जयशंकर
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

शामिल रहे।

इन बैठकों में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, उर्वरक, टेक्नोलॉजी और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।


📈 व्यापार बढ़ाने पर फोकस

दोनों देशों ने मौजूदा परिस्थितियों में द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के लिए नए कदमों पर विचार किया

लक्ष्य है कि साल 2030 तक भारत-रूस व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए।


🌾 उर्वरक और न्यूक्लियर सेक्टर में भी सहयोग

रूस ने बताया कि उसने 2025 के अंत तक भारत को 40% ज्यादा उर्वरक सप्लाई किया और भविष्य में भी जरूरतें पूरी करने के लिए तैयार है।

इसके अलावा, सिविल न्यूक्लियर ऊर्जा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं जताई गई हैं।


🌐 वैश्विक हालात पर भी चर्चा

बैठक में पश्चिम एशिया के हालात सहित कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।

दोनों देशों ने बदलती वैश्विक परिस्थितियों में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।

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