अनुज गुप्ता / Delhi Samachar
मेरे युवान भाई-बहनों! आज मैं आपसे कोई बड़ी बात करने नहीं आया, बस आपके पास बैठकर कुछ दिल की बातें साझा करना चाहता हूँ। अपनी 52 साल की उम्र और तजुर्बे के साथ जब मैं आपको देखता हूँ, तो आपकी आँखों में मुझे बड़े सपने भी दिखते हैं और एक अनकहा सा डर भी।
मुझे पता है, आज आप पर कितना दबाव है। एक तरफ करियर की वो दौड़ है जिसमें रुकने का नाम नहीं, और दूसरी तरफ वो बढ़ती महंगाई जो आपकी सारी मेहनत को धीरे-धीरे सोख रही है। आप दिन-रात एक कर रहे हैं ताकि अपनों को एक बेहतर ज़िंदगी दे सकें, लेकिन क्या आपको सच में वो सुकून महसूस हो रहा है?
शानदार जीवन हम अपने ही इस देश में खड़ा नहीं कर सकते ?
मेरे युवान भाई-बहनों, आजकल एक और नई होड़ लग गई है—सबको अपनी मिट्टी, अपना घर छोड़कर बस बाहर (विदेश) भागना है। हमें लगता है कि तरक्की और सुख सिर्फ वहीं है। पर कभी रुककर सोचना, क्या वो बेहतर व्यवस्था और वो शानदार जीवन हम अपने ही इस देश में खड़ा नहीं कर सकते? जिस देश की कल्पना आप बाहर जाकर कर रहे हैं, उसे हम अपनी ही इस ज़मीन पर बना सकते हैं, अपने ही इस देश में बना सकते हैं। बस ज़रूरत है अपनी मिट्टी से थोड़ी और मोहब्बत करने की और इसे संवारने की ज़िम्मेदारी उठाने की।
सोशल मीडिया असलियत से दूर ले जा रही है
आज हमारे जीवन का एक बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया की उन 15-20 सेकंड की वीडियो और पोस्ट में बीत रहा है। ये चमक-धमक वाली दुनिया हमें अपनी असलियत से दूर ले जा रही है। हम दूसरों की ‘दिखावटी’ खुशियों को देखने में इतने व्यस्त हो गए हैं कि हमें अपने आसपास हो रही लूट का अहसास ही नहीं हो रहा। हम रील की दुनिया में खोए हैं और यहाँ हकीकत में शिक्षा और स्वास्थ्य को एक महँगा कारोबार बना दिया गया है।
खून-पसीने की कमाई ‘डोनेशन’ के नाम पर लूट ली जाती
यह दर्द अब सहा नहीं जाता। जब एक छोटा बच्चा नर्सरी में कदम रखता है, तो माँ-बाप के खून-पसीने की कमाई ‘डोनेशन’ के नाम पर लूट ली जाती है। आपके माता-पिता ने आपको यहाँ तक पहुँचाने में अपनी पूरी पूंजी लगा दी, और आज आप उसी कर्ज और दबाव के नीचे दबे हुए हैं। यही हाल स्वास्थ्य का है। जब घर का कोई बुजुर्ग बीमार होता है, तो डॉक्टर के पास जाने की बात आते ही अपनी जेब की गहराई याद आ जाती है। बीमारी से ज्यादा इंसान उस इलाज के खर्च के डर से टूट जाता है। शिक्षा और स्वास्थ्य जो हमारा हक था, वह आज एक महँगा सौदा बन गया है। यह टीस कलेजा चीर देता है।
जहाँ आपकी काबिलियत की कद्र हो
मेरे युवान भाई-बहनों, मैं अक्सर यह महसूस करता हूँ कि आप एक ठहराव चाहते हैं, एक ऐसी स्थिरता जहाँ आपकी काबिलियत की कद्र हो। आप भी चाहते हैं कि आपका भविष्य सुरक्षित हो और ये देश वैसा ही लगे जैसा आपने बचपन के सपनों में सोचा था। यह दर्द सिर्फ आपका नहीं है, यह हम सबका है।
जहाँ शिक्षा और स्वास्थ्य व्यापार न हो
हमें किसी को दोष नहीं देना है, बस खुद से यह पूछना है कि क्या हम सही दिशा में जा रहे हैं? आओ, मिलकर हम इस देश के लिए एक ऐसे सपने को साकार करें, जहाँ शिक्षा और स्वास्थ्य व्यापार न हो, बल्कि हर इंसान की पहुँच में हो। आप इस देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। मैं बस इतना चाहता हूँ कि आप अपनी उस अंदरूनी आवाज़ को सुनें। यह वक्त किसी के पीछे आँख मूँदकर दौड़ने का नहीं, बल्कि थोड़ा ठहरकर अपनी ज़मीन की तरफ देखने का है। नया सूरज तभी निकलेगा जब आप अपनी समझ और अपनी गरिमा को पहचानेंगे।












