राघव चड्ढा विवाद को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के अंदर तनाव खुलकर सामने आ गया है। राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने के एक दिन बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चड्ढा पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने कहा कि चड्ढा “पार्टी लाइन से हटकर काम कर रहे थे” और उनके रुख पर सवाल उठते हैं।
🗣️ भगवंत मान का आरोप
भगवंत मान ने कहा कि विपक्ष में रहते हुए पार्टी के सभी फैसले सामूहिक रूप से लिए जाते हैं।
उन्होंने साफ किया कि अगर कोई सदस्य पार्टी के निर्देशों का पालन नहीं करता, तो यह पार्टी व्हिप के खिलाफ माना जाता है और ऐसे मामलों में कार्रवाई होती है।
⚠️ “महत्वपूर्ण मुद्दों से दूरी”
मान ने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा ने कई अहम मुद्दों पर पार्टी का साथ नहीं दिया।
उन्होंने कहा कि:
- पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से नाम हटाने जैसे मुद्दे
- गुजरात में AAP कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी
जैसे मामलों पर चड्ढा ने आवाज नहीं उठाई।
❓ “छोटे मुद्दे उठाने पर उठे सवाल”
मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि जब पार्टी बड़े मुद्दों पर बोलने की उम्मीद करती है, तब अगर कोई नेता समोसे या पिज्जा जैसे छोटे मुद्दे उठाता है, तो संदेह होना स्वाभाविक है।
उन्होंने संकेत दिया कि इससे नेता की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े होते हैं।
🏛️ राज्यसभा पद से हटाना ‘सामान्य प्रक्रिया’
राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटाने के फैसले को भगवंत मान ने सामान्य बताया।
उन्होंने कहा कि पार्टी में समय-समय पर ऐसे बदलाव होते रहते हैं और यह कोई असामान्य कदम नहीं है।
🔥 AAP का सख्त रुख
AAP के अन्य नेताओं ने भी चड्ढा पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा है।
पार्टी का कहना है कि संसद में केंद्र सरकार के खिलाफ मजबूत आवाज उठाने की जरूरत होती है, लेकिन कुछ नेता इस जिम्मेदारी से बचते नजर आए।
🧭 राजनीतिक संकेत क्या हैं?
इस पूरे घटनाक्रम को पार्टी के भीतर रणनीति और अनुशासन से जुड़ा मामला माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद आने वाले समय में पार्टी की आंतरिक राजनीति को प्रभावित कर सकता है।












