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डोपिंग में भारत बना नंबर-1: 148 एथलीट सस्पेंड, केन्या को पीछे छोड़ा, बड़े नाम भी लिस्ट में शामिल

भारत डोपिंग मामले एथलेटिक्स में चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट (AIU) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, डोपिंग उल्लंघन के मामलों में भारत अब दुनिया में पहले स्थान पर पहुंच गया है।

देश में कुल 148 एथलीट सस्पेंड हैं, जो केन्या से दो ज्यादा हैं।


📊 भारत ने केन्या को पीछे छोड़ा

1 अप्रैल 2026 तक जारी आंकड़ों के मुताबिक:

  • भारत: 148 सस्पेंड एथलीट
  • केन्या: 146 एथलीट
  • रूस: 66 एथलीट

यह पहली बार है जब भारत इस सूची में शीर्ष पर पहुंचा है।


🏃‍♀️ बड़े नाम भी शामिल

इस सूची में कई चर्चित भारतीय एथलीट्स के नाम भी शामिल हैं:

  • 100 मीटर राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी दुती चंद
  • मिडिल डिस्टेंस धावक परवेज खान
  • तमिलनाडु की स्प्रिंटर सेकर धनलक्ष्मी

इन खिलाड़ियों पर अलग-अलग अवधि के लिए प्रतिबंध लगाया गया है।


⚠️ सिर्फ डोपिंग ही नहीं, अन्य उल्लंघन भी

इस सूची में केवल डोपिंग नहीं, बल्कि अन्य गंभीर उल्लंघन भी शामिल हैं, जैसे:

  • टेस्ट से बचना
  • सैंपल में छेड़छाड़
  • प्रतिबंधित पदार्थों की तस्करी
  • लोकेशन जानकारी नहीं देना

इन सभी मामलों में डोपिंग जितनी ही सख्त सजा दी जाती है।


🏛️ AIU क्या है

एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट (AIU) एक स्वतंत्र संस्था है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एथलीट्स और उनके सहयोगियों पर नजर रखती है।

यह संस्था खेलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए काम करती है।


🚨 AFI ने सख्ती बढ़ाई

डोपिंग पर लगाम लगाने के लिए भारतीय एथलेटिक्स फेडरेशन (AFI) ने कई कदम उठाए हैं:

  • संदिग्ध ट्रेनिंग सेंटर्स की पहचान
  • कोचों के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन
  • बिना रजिस्ट्रेशन वाले कोचों को ब्लैकलिस्ट करना

ऐसे कोचों के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है।


🏋️‍♂️ ट्रेनिंग सिस्टम में बदलाव

2024 पेरिस ओलंपिक के बाद AFI ने राष्ट्रीय कैंप सिस्टम में बदलाव किया है।

अब केवल रिले टीमों के लिए राष्ट्रीय कैंप आयोजित किए जा रहे हैं, जबकि अन्य खिलाड़ी निजी संस्थानों या सरकारी विभागों के साथ ट्रेनिंग कर रहे हैं।


🧭 बढ़ती चुनौती

डोपिंग के बढ़ते मामलों ने भारतीय एथलेटिक्स के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए सख्त निगरानी और जागरूकता जरूरी है

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