Delhi Samachar / अनुज गुप्ता
आज दिल्ली के हर दूसरे घर की रसोई में एक ‘साइलेंट कलर’ लगा है, जसे हम शान से RO (Reverse
Osmosis) कहते हैं। विज्ञापन की चकाचौंध और बड़े सतारों के मुस्कु राते चेहरों ने हमें इस कदिर अंधा कर दिया है
क हम यह भूल गए हैं क 1 लीटर ‘साफ’ पानी पीने के लए हम 3 लीटर शुद्ध पानी नाली में बहा रहे हैं। यह सफर्फ
पानी की बबार्फदिी नहीं, बल्क आने विाली पीढ़ियों के साथ एक खामोश नाइंसाफी है।
दिल्ली का पाताल: चेताविनी की कगिार पर
दिल्ली सरकार और विशेषज्ञों की रपोटर्फ एक डराविनी सच्चाई बयां कर रही है। दिल्ली का लगभग 90% हस्सा
ऐसा है जहाँ भूजल स्तर तेज़ी से नीचे गर रहा है। विहीं, दिल्ली का 25% इलाका ‘अत-शोषत’ (Over
exploited) श्रेणी में आ चुका है, यानी यहाँ ज़मीन के अंदिर पानी अब खत्म होने की कगार पर है। दिक्षिण और
दिक्षिण-पश्चिम दिल्ली के कई इलाकों में पानी 800 से 1000 फीट की गहराई को छू रहा है।
RO का मायाजाल: विज्ञापन बनाम विास्तविकता
कसी बड़े फल्म स्टार के मुस्कु राते चेहरे ने टीविी पर आकर कह दिया क “शुद्ध पानी पयो”, तो हमने उसे पत्थर की
लकीर मान लया। लेकन सच्चाई यह है क विज्ञापनों के इस शोर में हम कुदिरत की आविाज़ सुनना भूल गए हैं।
कंपनयों ने हमारे मन में TDS (Total Dissolved Solids) का ऐसा खौफ पैदिा कया है क लोग 100-150 TDS
विाले पानी पर भी RO लगा लेते हैं।
सच्चाई क्या है?
वश्व स्वस्थ् संगठन (WHO) के अनुसर, 300 तक क TDS पनी पीने के लिए सुरक्षत
है। जब हम RO के ज़रए इसे 50 से भी नीचे लिे आते हैं, तो हम पनी के ज़रूरी मनरल्स (कैल्ल्शिम और
मैग्नील्शिम) खो देते हैं।
नाली में बहता हमारा कल
दिल्ली में पानी की भारी कल्लत है, फर भी हम RO लगाकर हर दिन करोड़ों लीटर पानी नाली में बहा दिेते हैं। दिल्ली
के छोटे कचनों में इस पानी को स्टोर करने की जगह नहीं है, और यही मजबूरी हमें लापरविाह बना दिेती है। हम अपनी
आज की सुविधा के लए आने विाले कल की नमी चुरा रहे हैं ।

अब जागिने का समय है !
अगर आपके पानी का TDS 400 से कम है, तो आपको RO की ज़रूरत नहीं है। एक साधारण UV+UF फ़िल्टर
अपनाएं, जो पानी बबार्फदि नहीं करता। हमें यह समझना होगा क यदि हमने आज अपनी आदितों को नहीं बदिला, तो
आने विाली नस्लें हमें कभी माफ नहीं करेंगी












