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ईरान-इजराइल जंग: ‘सुप्रीम लीडर’ पर गहराता सस्पेंस और तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर खड़ी दुनिया!

​अनुज गुप्ता | Delhi Samachar
नई दिल्ली/तेहरान: मध्य पूर्व (Middle East) से आ रही खबरों ने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं। israel and iran war इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सीधे टकराव ने वो हालात पैदा कर दिए हैं, जिनकी कल्पना भी डरावनी है। अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में इस वक्त सबसे बड़ा और सबसे चुभता हुआ सवाल एक ही है— Iran Supreme Leade Ayatollah Ali Khamenei ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई कहाँ हैं और क्या वो सुरक्षित हैं ?


​तेहरान में सन्नाटा: क्या इजराइल ने ‘असंभव’ को मुमकिन कर दिया?


​पिछले कुछ घंटों से वैश्विक मीडिया और खुफिया एजेंसियों के बीच खामेनेई की स्थिति को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। हालांकि, तेहरान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक खंडन या पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन हवाओं में तैरते सवाल कुछ और ही इशारा कर रहे हैं। जिस इजराइल ने हमास के इस्माइल हानिया और हिजबुल्लाह के हसन नसरल्लाह जैसे शीर्ष नेतृत्व को जड़ से उखाड़ फेंका, क्या अब उसका अगला निशाना ईरान का ‘पावर सेंटर’ है?


​इजराइल की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ और नेतन्याहू के कड़े तेवर


​बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र से लेकर अपनी कैबिनेट मीटिंग तक में साफ कर दिया है कि इजराइल के हाथ बहुत लंबे हैं और वो कहीं भी पहुँच सकते हैं। ईरान के सैन्य ठिकानों और मिसाइल सेंटर्स पर हुए हालिया हमलों ने यह साबित कर दिया है कि इजराइल अब ‘प्रॉक्सी वॉर’ के मूड में नहीं है, बल्कि वह सीधे दुश्मन के दिल पर चोट कर रहा है।


​महायुद्ध की आहट: क्या बारूद का ढेर फटने वाला है?
​यह सिर्फ दो मुल्कों की लड़ाई नहीं रह गई है। अगर ईरान के सुप्रीम लीडर को लेकर चल रही खबरों में रत्ती भर भी सच्चाई निकलती है, तो रूस, चीन और अमेरिका जैसे महाशक्तियों का इस युद्ध में कूदना तय माना जा रहा है। दुनिया भर के रक्षा विशेषज्निकलती है, तो रूस, चीन और अमेरिका जैसे महाशक्तियों का इस युद्ध में कूदना तय माना जा रहा है। दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि हम अनजाने में तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत देख रहे हैं।


​भारत के लिए क्या है इसके मायने?
​इस विशेष रिपोर्ट में यह समझना जरूरी है कि खाड़ी देशों में मचने वाली यह उथल-पुथल भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा प्रहार करेगी। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वहां फंसे लाखों भारतीयों की सलामती, भारत सरकार के लिए इस वक्त सबसे बड़ी प्राथमिकता है।


​निष्कर्ष: दुनिया को अगले संदेश का इंतज़ार
​ईरान इस वक्त अपनी क्रांति और वजूद की सबसे बड़ी परीक्षा दे रहा है। खामेनेई का होना या न होना, सिर्फ एक व्यक्ति की खबर नहीं है, बल्कि पूरे मध्य पूर्व के नक्शे के बदलने की शुरुआत है। आने वाले कुछ घंटे तय करेंगे कि दुनिया शांति की ओर बढ़ेंगे या विनाश की ओर।

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