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38 साल पहले दिया गया डोनाल्ड ट्रंप का ‘खार्ग द्वीप’ पर कार्रवाई का बयान फिर चर्चा में

मध्य-पूर्व तनाव के बीच खार्ग द्वीप पर अमेरिकी कार्रवाई चर्चा में

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच खार्ग द्वीप (Kharg Island) को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव की स्थिति सुर्खियों में है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के पुराने बयान फिर चर्चा में आ गए हैं, जिसमें उन्होंने दशकों पहले ईरान के इस महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी।

खार्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का एक अहम केंद्र माना जाता है और इसे देश की ऊर्जा संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा समझा जाता है।

1988 के इंटरव्यू का बयान फिर वायरल

साल 1988 में दिए गए एक इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि यदि किसी अमेरिकी सैनिक या जहाज पर हमला होता है तो वे ईरान के खार्ग द्वीप के खिलाफ सख्त कदम उठा सकते हैं। उस समय ट्रंप एक कारोबारी के रूप में जाने जाते थे और राजनीति में आने की संभावनाओं पर विचार कर रहे थे।

हाल के घटनाक्रम के बाद यह पुराना बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में फिर सामने आया है।

अमेरिकी सेना की कार्रवाई का दावा

हालिया घटनाओं में अमेरिका ने दावा किया कि उसकी सेना ने खार्ग द्वीप पर मौजूद सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल (Truth Social) पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिकी हथियार अत्याधुनिक हैं और उन्होंने द्वीप पर मौजूद सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि द्वीप के तेल ढांचे को फिलहाल निशाना नहीं बनाया गया है, लेकिन यदि समुद्री मार्गों की सुरक्षा में बाधा आई तो इस निर्णय पर दोबारा विचार किया जा सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य संकट से बढ़ी चिंता

इस पूरे घटनाक्रम के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की स्थिति भी अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बनी हुई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का महत्वपूर्ण रास्ता है और अनुमान के अनुसार दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार का परिवहन इसी मार्ग से होता है।

ईरान द्वारा इस मार्ग को बंद करने की आशंका के बाद वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

कई देशों की नौसैनिक तैनाती की संभावना

अमेरिकी नेतृत्व का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रखने के लिए कई देश अपने युद्धपोत भेज सकते हैं। इनमें चीन (China), फ्रांस (France), जापान (Japan), दक्षिण कोरिया (South Korea) और ब्रिटेन (United Kingdom) जैसे देश शामिल बताए जा रहे हैं।

अमेरिका का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री यातायात की सुरक्षा बनाए रखना जरूरी है।

ईरान की प्रतिक्रिया और चेतावनी

इस बीच ईरान ने कहा है कि खार्ग द्वीप पर स्थित उसके तेल और ऊर्जा ढांचे सुरक्षित हैं। साथ ही ईरानी सैन्य नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि यदि उसकी ऊर्जा संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई तो क्षेत्र में मौजूद उन कंपनियों की सुविधाओं को निशाना बनाया जा सकता है जो अमेरिका से जुड़ी हैं या उसके साथ सहयोग करती हैं।

ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है और जवाबी कदम उठाने की बात कही है।


लेखक – DelhiSamachar
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