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Global Energy Crisis: 1970 के ऑयल शॉक और यूक्रेन युद्ध से भी बड़ा संकट, होरमुज स्ट्रेट पर तनाव से तेल-गैस सप्लाई प्रभावित, IEA की चेतावनी से बढ़ी चिंता

Global Energy Crisis को लेकर दुनिया के सामने बड़ा खतरा खड़ा हो गया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रमुख ने चेतावनी दी है कि मौजूदा संकट 1970 के दशक के तेल संकट और यूक्रेन युद्ध के असर से भी ज्यादा गंभीर हो चुका है।

वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।


⛽ तेल सप्लाई में भारी कमी

ऊर्जा क्षेत्र के ताजा हालात के अनुसार, वैश्विक तेल आपूर्ति में करीब 1.1 करोड़ बैरल प्रतिदिन (11 मिलियन bpd) की कमी आई है।

यह गिरावट 1973 और 1979 के तेल संकट से भी ज्यादा मानी जा रही है।


🔥 LNG गैस सप्लाई भी प्रभावित

सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि एलएनजी (LNG) की सप्लाई में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

  • करीब 140 बिलियन क्यूबिक मीटर गैस की कमी
  • यूक्रेन युद्ध के बाद यह कमी लगभग 75 bcm थी

इससे साफ है कि मौजूदा संकट कहीं ज्यादा गहरा है।


🚢 होरमुज जलडमरूमध्य बना संकट की जड़

वैश्विक ऊर्जा संकट की सबसे बड़ी वजह होरमुज जलडमरूमध्य में तनाव है।

यह मार्ग दुनिया के कुल तेल और गैस सप्लाई का करीब 20% हिस्सा संभालता है।

इस क्षेत्र में अवरोध और हमलों के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।


🏭 ऊर्जा ढांचे को भी भारी नुकसान

संघर्ष के दौरान अब तक:

  • 9 देशों में 40 से ज्यादा ऊर्जा संयंत्र क्षतिग्रस्त
  • इससे उत्पादन और सप्लाई दोनों पर असर पड़ा

यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन गई है।


📈 तेल की कीमतों में तेज उछाल

युद्ध शुरू होने के बाद से तेल की कीमतों में 50% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है।

महंगे तेल का सीधा असर महंगाई और आर्थिक विकास पर पड़ रहा है।


⚠️ वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

ऊर्जा की कमी से उत्पादन लागत बढ़ेगी, महंगाई तेज होगी और कई देशों की आर्थिक स्थिति कमजोर पड़ सकती है।


🛢️ आपातकालीन भंडार से तेल निकालने की तैयारी

स्थिति को संभालने के लिए कई देश अपने रणनीतिक तेल भंडार से आपूर्ति बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।

इसके तहत करीब 400 मिलियन बैरल तेल रिलीज करने की योजना बनाई गई है।


🌍 समाधान क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट का सबसे बड़ा समाधान होरमुज जलमार्ग को सामान्य करना है।

जब तक यह मार्ग पूरी तरह से खुला नहीं होता, तब तक ऊर्जा संकट बना रह सकता है।


📊 आगे क्या संकेत

मौजूदा हालात में:

  • तेल और गैस की कीमतें ऊंची रह सकती हैं
  • वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी रह सकती है
  • ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव जारी रहेगा

ऐसे में दुनिया की नजर अब इस संकट के जल्द समाधान पर टिकी हुई है।


✍️ लेखक

लेखक – DelhiSamachar
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