Jaiprakash Associates Bid को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। वेदांता रिसोर्सेज के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने दावा किया है कि उनकी कंपनी को सबसे ऊंचा बोलीदाता घोषित किया गया था, लेकिन बाद में यह फैसला बदल दिया गया।
उन्होंने संकेत दिया कि इस पूरे मामले को लेकर कंपनी अब कानूनी रास्ता अपनाने की तैयारी में है।
⚖️ बोली प्रक्रिया पर उठाए सवाल
अनिल अग्रवाल के अनुसार, यह बोली प्रक्रिया दिवालिया और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के तहत लेनदारों की समिति (CoC) द्वारा कराई गई थी।
- कई कंपनियों ने इस प्रक्रिया में हिस्सा लिया
- धीरे-धीरे अन्य बोलीदाता बाहर हो गए
- अंत में वेदांता को सबसे ऊंचा बोलीदाता घोषित किया गया
उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी थी और कंपनी को लिखित रूप में इसकी जानकारी दी गई थी।
🔄 बाद में बदला गया निर्णय
अग्रवाल ने कहा कि कुछ दिनों बाद इस निर्णय को बदल दिया गया।
हालांकि उन्होंने विस्तार से जानकारी साझा नहीं की, लेकिन साफ किया कि अब यह मामला उचित मंच पर उठाया जाएगा।
🏢 अडानी एंटरप्राइजेज को मिला प्रोजेक्ट
इस मामले में बाद में अडानी एंटरप्राइजेज की बोली को मंजूरी दी गई।
- नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की इलाहाबाद बेंच ने 17 मार्च 2026 को प्रस्ताव को मंजूरी दी
- अडानी की बोली करीब 14,535 करोड़ रुपये की थी
📊 वेदांता की बोली थी ज्यादा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेदांता ने करीब 16,000 करोड़ रुपये की उच्च बोली लगाई थी।
इसके बावजूद लेनदारों ने अडानी के प्रस्ताव को प्राथमिकता दी क्योंकि:
- अग्रिम भुगतान अधिक था (6000 करोड़ रुपये से ज्यादा)
- भुगतान की समयसीमा कम थी
🧑⚖️ कानूनी चुनौती की तैयारी
वेदांता ने इस फैसले के खिलाफ अपील भी दायर की है।
- कंपनी ने NCLAT में NCLT के आदेश को चुनौती दी
- अब आगे इस मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी रहने की संभावना है
📜 पुरानी यादों का जिक्र
अनिल अग्रवाल ने अपने बयान में जयप्रकाश एसोसिएट्स के संस्थापक जयप्रकाश गौर के साथ हुई पुरानी मुलाकात का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि गौर की इच्छा थी कि उनका बनाया हुआ व्यवसाय सही हाथों में जाए और आगे बढ़े।
🧘 गीता के संदेश का उल्लेख
अग्रवाल ने इस पूरे घटनाक्रम को भगवद गीता की सीख से जोड़ते हुए कहा कि कंपनी बिना किसी लगाव के अपना पक्ष रखेगी और उचित प्रक्रिया का पालन करेगी।












