अनुज गुप्ता / Delhi Samachar
बीते 17 जनवरी को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित रामकथा मे अध्यात्म की दुनिया मे एक नए और चिंताजनक स्वरूप को जन्म दिया है । मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जिन्होंने निषाद राज को गले लगाया और शबरी के झूठे बेर खाए उनके नाम पर होने वाली कथा में आम आदमी के लिए दरवाजे बंद कर दिए गए । एक तरफ व्यास पीठ से सत्य प्रेम करुणा की गूंज थी तो दूसरी तरफ गेट पर अपनी तलाशी और अपमान सहता वह साधारण सा व्यक्ति था जो केवल राम की आस में और मुरारी बापू के दर्शन करने पहुंचा था।
आस्था पर भारी पड़ा VIP कल्चर

17 जनवरी जब आस्था पर भारी पड़ा वीआईपी कल्चर भारत मंडपम की कथा में जिस तरह की सुरक्षा और पास की व्यवस्था देखी गई उसने यह स्पष्ट कर दिया कि आयोजन आम लोगों के लिए नहीं बल्कि विशिष्ट जनों के लिए था । पास के लिए लोग लाइन लगाकर घंटों खड़े रहे । घंटों इंतजार के बाद काउंटर पर बोला गया “पास नहीं है , खत्म हो गए हैं” जबकि मात्र 2022 को पास ही बांटे गए थे। आम श्रद्धालु को बस इतना कह कर बहार का रास्त दिखा दिया गया । जबकि अंदर की कुर्सियां रासुकदारों के लिए सुरक्षित थी । सवाल यह है अगर राम सबके हैं तो राम की कथा में यह भेदभाव क्यों ? क्यों आपने वोटिंग्स लगाई ? क्यों आपने प्रचार किया ? क्या मुरारी बापू को यह नजर नहीं आया कि उनके नाम पर उनके अपने भक्तों को अपमानित कर किया जा रहा है ।
मौन जो चुभता है …
राजनीति और सामाजिक न्याय पर चुप्पी ,मुरारी बापू अक्सर खुद को गांधीवादी कहते हैं । गांधी जी ने सत्य का प्रयोग किया और सत्ता से लोहा लिया लेकिन आज जब देश आर्थिक असमानता बेरोजगारी और सामाजिक तनाव के दौर से गुजर रहा था तब गांधी काभी मौन नहीं रहे । लेकिन मुरारी बापू का मौन उनकी गांधीवादी छवि पर सवाल उठता है ? क्या बापू को सत्ता का डर है ? या फिर उन व्यक्तियों का जो उनकी कथाओं में करोड़ों के बिल भरते हैं । राम ने अन्याय के खिलाफ धनुष उठाया था लेकिन व्यास पीठ पर बैठे बापू ने व्यवस्था की कमियों पर एक शब्द ने बोलने का मौन व्रत ले रखा है।
फकीर होने का दावा…अरबों का साम्राज्य
मुरारी बापू सार्वजनिक रूप से कहते हैं कि वह कथाओं का पैसा नहीं लेते और बिल्कुल साधारण से कमरे में रहते हैं लेकिन उनके नाम से जुड़े ट्रस्टों की संपत्ति और आयोजन का भव्य पैमाने कुछ और ही कहानी कहता है चार्टर्ड प्लेन से यात्रा VIP लॉन्च में प्रवास और हाईटेक डिजिटल साम्राज्य यह सब बिना एक विशाल वित्तीय तंत्र के संभव नहीं है । यदि आप फकीर है तो इस वैभव का श्रोत और उद्देश्य क्या है ? लोगों का यह जानने का हक हैं ।
वक्त आ गया है सवाल पूछने का
25 साल तक एक गुरु को सुनने के बाद जब भक्त को एहसास हो कि वह केवल एक बिजनेस मॉडल का हिस्सा है । तो यह पीड़ा असहनीय होती है । मुरारी बापू को यह समझना होगा कि राम केवल कथा सुनाने की वस्तु नहीं है, बल्कि जीने का आचरण है यदि आपकी कथा में गरीब का अपमान है और आपके शब्दों में सत्ता के खिलाफ सच बोलने का साहस नहीं, तो आप व्यास पीठ के साथ न्याय नहीं कर रहे । यह लेखक के निजी विचार और प्रत्यक्ष अनुभव है । मैं आपसे सवाल पूछता हूं यह व्यवस्था क्यों की गई ? आप चुप क्यों है ? मैंने जो भारत मंडपम में अपनी आंखों से देखा है वह हाल में आपसे लिख रहा हूं ।












