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महाराज जी ​क्या आपके राज में निवेशकों की मेहनत पर बुलडोजर चलाना ही सुशासन है?


​अनुज गुप्ता| Delhi Samachar

साथियों, मैं आज अपनी पीड़ा आप सबके सामने रख रहा हूँ।
​महाराज जी, हमने आपकी सरकार और उत्तर प्रदेश के सिस्टम पर भरोसा करके Mulberry Cabana नाम से 66 कॉटेज का एक प्रोजेक्ट शुरू किया था। ALLOW ME FIRST BUILDCON PVT LTD के जरिए मथुरा (मांट) में हमने इसमें बड़ा निवेश किया था। हमारा प्रोजेक्ट 80% पूरा हो चुका था, लेकिन हमें अंदाजा भी नहीं था कि जिस शासन के भरोसे हमने यहाँ इतना बड़ा निवेश किया, उसी के अफसर हमारे इस सपने को सरेआम मिट्टी में मिला देंगे।

बेलगाम अफसरशाही का जीता-जागता सबूत


​4 फरवरी को यमुना अथॉरिटी के अफसरों ने जो किया, वह बेलगाम अफसरशाही का जीता-जागता सबूत है। बिना किसी नोटिस और बिना किसी चेतावनी के अफसरों ने हमारे प्रोजेक्ट पर धावा बोल दिया। अफसरों का अहंकार इतना था कि उन्होंने गेट खुलने तक का इंतज़ार नहीं किया और जेसीबी से मेन गेट तोड़कर जबरदस्ती अंदर घुस गए।

बेदर्दी के साथ ‘Mulberry Cabana’ को उजाड़ा गया


​आज हम सवालों के घेरे में खड़े होकर खुद से यही पूछ रहे हैं कि आखिर हमारा अपराध क्या था? जिस बेदर्दी के साथ ‘Mulberry Cabana’ को उजाड़ा गया, जिस तरह जेसीबी से ईंट-ईंट और पाइप तक खींचकर निकाले गए, क्या प्रशासनिक कार्रवाई ऐसी होती है? यह कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक निवेशक के वजूद को खत्म करने का तांडव था। मैं पूछना चाहता हूँ कि क्या इस तरह की क्रूरता ही आपके सिस्टम की पहचान है?

अफसर अब देश के कानून और कोर्ट से भी बड़े हो गए हैं
​सबसे गंभीर बात यह है कि हमारा मामला NGT (अदालत) में चल रहा है और अगली तारीख भी तय थी। हमारे एडवोकेट मौके पर कोर्ट के कागजात दिखाते रहे, उन्हें बार-बार बताया गया कि मामला अदालत के अधीन है, लेकिन इन अफसरों ने कानून को ताक पर रख दिया। कोर्ट की तारीख होने के बावजूद 20-20 बुलडोजरों से 18 महीने की मेहनत को 30 मिनट में जमींदोज कर देना, सीधे तौर पर ‘अदालत की अवमानना’ है। क्या आपके अफसर अब देश के कानून और कोर्ट से भी बड़े हो गए हैं?

आपके अफसर निवेशकों के भरोसे का गला घोंट रहे हैं

अफसरों ने सफेद झूठ बोला कि यह जमीन उनकी है। मैं पूछना चाहता हूँ कि जिस जमीन की 2008 में धारा 143 (आबादी दर्जा) हो चुकी थी और जिसके 32 कॉटेज की सरकारी रजिस्ट्री खुद सरकार ने की, वो जमीन रातों-रात ‘अवैध’ कैसे हो गई? क्या सरकारी रजिस्ट्री की अब कोई कानूनी कीमत नहीं रह गई है?
​इस पूरी तबाही में हमारी 6 करोड़ की पूंजी और हमारी मार्केट वैल्यू दोनों मटियामेट कर दी गई। अफसरों ने स्टाफ के मोबाइल तक छीन लिए ताकि इस सरकारी गुंडागर्दी का कोई वीडियो न बना सके। महाराज जी, आपके राज में एक बेगुनाह निवेशक के साथ ऐसा सलूक किया गया जैसे हम कोई माफिया या अपराधी हों।
​एक तरफ आप निवेश लाने की बात करते हैं, और दूसरी तरफ आपके अफसर निवेशकों के भरोसे का गला घोंट रहे हैं। यह सिर्फ मेरी पीड़ा नहीं है, यह उस हर आदमी के लिए चेतावनी है जो इस सिस्टम पर भरोसा करके यूपी में पैसा लगा रहा है।

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