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Rupee गिरावट: वेस्ट एशिया युद्ध के बीच रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, डॉलर के मुकाबले 93.94 तक फिसला, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें

Rupee गिरावट सोमवार (23 मार्च 2026) को और तेज हो गई। वेस्ट एशिया में जारी युद्ध और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 93.94 तक पहुंच गया।

शुरुआती कारोबार में ही रुपये पर दबाव साफ नजर आया। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और घरेलू शेयर बाजार में गिरावट ने स्थिति को और कमजोर कर दिया।


📉 रुपये की ऐतिहासिक गिरावट

इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया 93.84 पर खुला और गिरकर 93.94 तक पहुंच गया। यह पिछले बंद स्तर से 41 पैसे की गिरावट है।

शुक्रवार को भी रुपया पहली बार 93 के पार गया था और 93.53 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था।


⛽ कच्चे तेल की कीमतें बनी बड़ी वजह

रुपये की कमजोरी की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की महंगी कीमतें हैं।

भारत को खाड़ी देशों से आयात होने वाले तेल के लिए अब ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ी है और रुपया दबाव में आ गया है।


💸 विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।

  • शुक्रवार को ₹5,518 करोड़ की बिकवाली
  • इससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव बना

डॉलर की मांग बढ़ने से रुपये की कीमत और गिर गई।


📊 शेयर बाजार में गिरावट का असर

घरेलू शेयर बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली:

  • सेंसेक्स 1,306 अंक गिरकर 73,226 पर
  • निफ्टी 418 अंक टूटकर 22,696 पर

बाजार की इस गिरावट ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया और रुपये पर असर डाला।


🌍 डॉलर की मजबूती भी कारण

डॉलर इंडेक्स हल्की बढ़त के साथ 99.66 पर बना रहा।

मजबूत डॉलर के कारण अन्य मुद्राओं पर दबाव बढ़ता है, जिसमें रुपया भी शामिल है।


🏦 RBI की भूमिका और आगे का संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है ताकि गिरावट को नियंत्रित किया जा सके।

हालांकि, तेल कंपनियों और विदेशी निवेशकों की डॉलर मांग अभी भी ऊंची बनी हुई है, जिससे दबाव जारी रह सकता है।


📦 विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट

हाल ही में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में भी कमी आई है।

  • एक सप्ताह में $7.05 अरब की गिरावट
  • कुल भंडार घटकर $709.75 अरब रह गया

यह भी रुपये के लिए नकारात्मक संकेत माना जा रहा है।


📌 निवेशकों और आम लोगों के लिए क्या मतलब

रुपये की गिरावट का असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है:

  • आयातित सामान महंगे हो सकते हैं
  • पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है
  • महंगाई बढ़ने की आशंका

ऐसे में आर्थिक स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।


✍️ लेखक

लेखक – DelhiSamachar
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