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महिला आरक्षण और परिसीमन पर विशेष सत्र को लेकर सियासत तेज, कांग्रेस का आरोप—राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश

महिला आरक्षण बिल विशेष सत्र को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि संसद का प्रस्तावित विशेष सत्र चुनावी राज्यों में राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से बुलाया जा रहा है।

शुक्रवार (3 अप्रैल 2026) को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी नेताओं ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन बताया।


⚖️ कांग्रेस का सरकार पर गंभीर आरोप

कांग्रेस का कहना है कि सरकार महिला आरक्षण कानून में संशोधन और परिसीमन (Delimitation) से जुड़े विधेयकों को जल्दबाजी में पास करना चाहती है।

पार्टी के अनुसार, यह कदम पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश हो सकता है।


🧭 परिसीमन पर जताई चिंता

कांग्रेस ने परिसीमन प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।

पार्टी का कहना है कि अगर लोकसभा सीटों का पुनर्गठन जल्दबाजी में किया गया, तो इसका असर कई राज्यों के प्रतिनिधित्व पर पड़ सकता है।

अनौपचारिक जानकारी के अनुसार:

  • उत्तर प्रदेश में सीटें बढ़कर 120 तक जा सकती हैं
  • जबकि केरल जैसे राज्यों में यह संख्या करीब 30 तक सीमित रह सकती है

कांग्रेस का दावा है कि इससे दक्षिण, पूर्वोत्तर और छोटे राज्यों को नुकसान हो सकता है।


📅 विशेष सत्र के समय पर सवाल

कांग्रेस नेताओं ने पूछा कि जब चुनावी प्रक्रिया जारी है, तो ऐसे में विशेष सत्र बुलाने की क्या जरूरत है।

उनका कहना है कि यह सत्र 15 दिन बाद भी बुलाया जा सकता था, लेकिन सरकार ने चुनाव के दौरान ही इसे आयोजित करने का फैसला लिया।


🗳️ 16 अप्रैल से फिर शुरू होगा सत्र

संसद का बजट सत्र 16 अप्रैल से दोबारा शुरू होने वाला है।

सूत्रों के मुताबिक:

  • 16, 17 और 18 अप्रैल को बैठक हो सकती है
  • इस दौरान महिला आरक्षण कानून में संशोधन और परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव लाए जा सकते हैं

🤝 सर्वदलीय बैठक की मांग

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मांग की है कि इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए

उनका कहना है कि चुनाव खत्म होने के बाद सभी दलों के साथ चर्चा कर फैसला लिया जाना चाहिए।


📊 सीट बढ़ाने की योजना पर बहस

सरकार लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने की दिशा में काम कर रही है, ताकि महिला आरक्षण कानून को लागू किया जा सके।

हालांकि विपक्ष का आरोप है कि यह कदम राजनीतिक फायदे के लिए जल्दबाजी में उठाया जा रहा है


🔥 संसद में भी टकराव

इस मुद्दे को लेकर संसद के दोनों सदनों में भी तीखी बहस देखने को मिली।

एक तरफ सरकार का कहना है कि उसे कानून लाने का पूरा अधिकार है, वहीं विपक्ष इसे दबाव की राजनीति करार दे रहा है।


🧠 आगे की रणनीति

कांग्रेस नेतृत्व जल्द ही अपने सांसदों और अन्य विपक्षी दलों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय करेगा।

यह मामला आने वाले दिनों में केंद्र और विपक्ष के बीच बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

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