लैंड फॉर जॉब्स केस में सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जांच एजेंसी से जवाब मांगा है। यह मामला पूर्व बिहार मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को तय की है।
राबड़ी देवी की मांग क्या है
राबड़ी देवी का कहना है कि उन्हें उन दस्तावेजों तक भी पहुंच दी जाए, जिनका उपयोग अभियोजन पक्ष ने नहीं किया है।
उनके अनुसार, इन दस्तावेजों के बिना वह गवाहों, खासकर सरकारी गवाहों से प्रभावी जिरह नहीं कर पाएंगी।
ट्रायल कोर्ट ने क्यों किया था इनकार
इससे पहले 18 मार्च को ट्रायल कोर्ट ने राबड़ी देवी और लालू प्रसाद यादव की याचिका खारिज कर दी थी।
अदालत का कहना था कि:
- अभियोजन द्वारा उपयोग न किए गए दस्तावेजों को पाने का स्वतः अधिकार नहीं होता
- पहले अभियोजन अपने साक्ष्य प्रस्तुत करेगा
- जिरह से पहले ऐसे दस्तावेज मांगना जरूरी शर्त नहीं है
क्या है पूरा लैंड फॉर जॉब्स मामला
यह मामला उस समय का है जब 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे।
जांच एजेंसी के अनुसार:
- रेलवे में ग्रुप-डी पदों पर नियुक्ति के बदले जमीन ली गई
- कई उम्मीदवारों या उनके रिश्तेदारों ने जमीन सस्ते दाम पर ट्रांसफर की
- यह जमीन पटना सहित कई जगहों पर परिवार और सहयोगियों के नाम की गई
लालू परिवार का क्या कहना है
लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार इन सभी आरोपों से इनकार करता रहा है।
उनका कहना है कि यह मामला पूरी तरह से राजनीतिक साजिश के तहत बनाया गया है।
मामले में आगे क्या
अब सभी की नजरें 1 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी हैं।
हाईकोर्ट का फैसला इस केस की दिशा तय कर सकता है, खासकर यह कि क्या बचाव पक्ष को अतिरिक्त दस्तावेज मिलेंगे या नहीं।
लेखक – DelhiSamachar
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