Strait of Hormuz Crisis के बीच ईरान ने उन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि वह जहाजों से मार्ग देने के बदले भारी शुल्क वसूल रहा है।
सरकार ने साफ किया कि इस तरह की कोई आधिकारिक नीति लागू नहीं की गई है और ये दावे निराधार हैं।
विवाद कैसे शुरू हुआ
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब ईरान के एक सांसद ने बयान दिया कि मौजूदा हालात में जहाजों से ट्रांजिट फीस ली जा सकती है।
उन्होंने कहा था कि युद्ध की स्थिति में लागत बढ़ती है और ऐसे में यह कदम ईरान के अधिकार को दर्शाता है।
हालांकि बाद में ईरानी अधिकारियों ने इस बयान से दूरी बना ली।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का वैश्विक महत्व
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है।
- यहां से करीब 20% वैश्विक तेल और गैस सप्लाई गुजरती है
- यह एशिया और यूरोप के बीच ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है
मार्च की शुरुआत से बढ़ते तनाव के कारण यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
शिपिंग पर असर और चुनिंदा रोक
रिपोर्ट्स के अनुसार, क्षेत्र में जहाजों की गति धीमी हो गई है।
- कुछ जहाजों को रोकने जैसी स्थिति बनी
- ईरान का कहना है कि केवल “दुश्मन देशों” से जुड़े जहाजों पर ही प्रतिबंध लागू हैं
कुछ मामलों में छूट भी दी गई है, जहां कुछ देशों के जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिला।
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता टकराव
तनाव तब और बढ़ गया जब अमेरिका की ओर से ईरान को जलमार्ग पूरी तरह खोलने के लिए समय सीमा दी गई।
साथ ही चेतावनी दी गई कि ऐसा न करने पर ऊर्जा ढांचे पर कार्रवाई हो सकती है।
इसके जवाब में ईरान ने भी कड़े रुख के संकेत दिए और कहा कि किसी भी हमले की स्थिति में जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद किया जा सकता है।
सुरक्षा हालात और हालिया हमला
हाल के दिनों में समुद्री सुरक्षा भी कमजोर हुई है।
- एक घटना में विस्फोटक से भरी नावों ने दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया
- इस हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हुई
यह घटनाएं क्षेत्र में बढ़ते खतरे को दर्शाती हैं।
वैश्विक बाजार पर असर
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव का असर सीधे वैश्विक बाजार पर दिख रहा है।
- ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी
- सप्लाई चेन पर दबाव
- शिपिंग कंपनियों के लिए जोखिम बढ़ा
यदि भविष्य में कोई शुल्क लागू होता है, तो इससे हालात और जटिल हो सकते हैं।
क्या आगे स्थिति सुधरेगी
फिलहाल ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह शुल्क वसूली जैसी कोई नीति लागू नहीं कर रहा है।
लेकिन जमीनी हालात अब भी संवेदनशील बने हुए हैं, जिससे वैश्विक चिंता बनी हुई है।
लेखक – DelhiSamachar
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