घायल सैन्य कैडेट एक्स-सर्विसमैन दर्जा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से अहम सवाल पूछा है। अदालत ने पूछा है कि प्रशिक्षण के दौरान घायल या विकलांग हो जाने वाले कैडेट्स को क्या पूर्व सैनिक का दर्जा दिया जा सकता है, ताकि उन्हें सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिल सके।
इस मुद्दे पर कोर्ट ने केंद्र से विस्तृत जवाब मांगा है।
⚖️ कोर्ट ने क्या कहा
न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि अधिकांश कैडेट्स की उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच होती है, और ऐसे में उनके लिए रोजगार बेहद जरूरी है।
अदालत ने संकेत दिया कि बोर्ड आउट (अयोग्य घोषित) किए गए कैडेट्स को एक्स-सर्विसमैन श्रेणी में शामिल करने पर विचार किया जाना चाहिए।
🎯 आरक्षण और नौकरी का मुद्दा
अगर इन कैडेट्स को पूर्व सैनिक का दर्जा मिलता है, तो वे:
- सरकारी नौकरियों में आरक्षण
- अर्ध-सरकारी संस्थानों में अवसर
का लाभ उठा सकते हैं।
कोर्ट ने कहा कि इस दिशा में नीति बनाने की जरूरत है।
📂 केंद्र सरकार से मांगा जवाब
केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर समग्र जवाब दाखिल करेगी।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय जरूरी है।
🩺 बीमा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी चर्चा
सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी सुझाव दिया था कि ऐसे कैडेट्स को:
- ग्रुप इंश्योरेंस कवर
- बेहतर मेडिकल सहायता
दी जानी चाहिए।
अभी उन्हें मिलने वाली ₹40,000 की एकमुश्त राशि को भी बढ़ाने पर विचार करने को कहा गया है।
🏥 स्वास्थ्य योजना लागू करने में देरी
अदालत को बताया गया कि इन कैडेट्स को ECHS (Ex-Servicemen Contributory Health Scheme) का लाभ देने का प्रस्ताव तैयार हो चुका है, लेकिन इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है।
इस पर भी कोर्ट ने चिंता जताई।
💼 पुनर्वास योजना पर जोर
कोर्ट ने केंद्र से यह भी कहा कि घायल कैडेट्स के लिए:
- डेस्क जॉब
- रक्षा सेवाओं से जुड़े अन्य काम
जैसे विकल्प तैयार किए जाएं, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।
📊 कितने कैडेट प्रभावित
जानकारी के अनुसार, 1985 से अब तक करीब 500 कैडेट्स प्रशिक्षण के दौरान चोट या विकलांगता के कारण सेवा से बाहर हो चुके हैं।
इनमें से कई को आज भी उच्च मेडिकल खर्च और सीमित आर्थिक सहायता का सामना करना पड़ रहा है।
🧭 मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला तब सामने आया जब कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए उन कैडेट्स की समस्याओं पर सुनवाई शुरू की, जो देश के प्रमुख सैन्य संस्थानों में प्रशिक्षण के दौरान घायल हुए थे।
इसमें NDA और IMA जैसे संस्थानों के कैडेट्स भी शामिल हैं।












