Supreme Court Hate Speech Remark: सभी के लिए हो लड़ाई
Supreme Court Hate Speech Remark के तहत सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नफरत भरे भाषण के खिलाफ आवाज केवल किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि पूरे समाज के हित में होनी चाहिए।
कोर्ट की अहम टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा:
- “किसी एक समुदाय को ही सुरक्षा की मांग क्यों करनी चाहिए?”
- “हमें यह कहना चाहिए कि कोई भी हेट स्पीच न करे”
कोर्ट ने इस मुद्दे को व्यापक सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ा।
ब्राह्मण समुदाय से जुड़ी याचिका पर सुनवाई
यह मामला उस याचिका से जुड़ा था जिसमें:
- ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ hate speech (नफरत भरी भाषा) पर कार्रवाई की मांग की गई थी
- याचिकाकर्ता ने ‘Brahmophobia (ब्राह्मणफोबिया)’ शब्द का भी जिक्र किया
- इसे जाति आधारित भेदभाव मानने की मांग की गई
कोर्ट का रुख: सभी समुदायों की सुरक्षा जरूरी
अदालत ने साफ कहा:
- किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत स्वीकार्य नहीं
- समाज में tolerance (सहिष्णुता) और धैर्य जरूरी
- भाईचारे की भावना से ही ऐसे मामलों पर रोक लग सकती है
समाज की भूमिका पर जोर
कोर्ट ने यह भी कहा:
- शिक्षा और बौद्धिक विकास से समाज मजबूत होता है
- प्रतिक्रिया देने से विवाद बढ़ सकता है
- कई बार नजरअंदाज करने से मुद्दे खुद खत्म हो जाते हैं
याचिका वापस लेने की अनुमति
सुनवाई के अंत में:
- याचिकाकर्ता को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दी गई
- कोर्ट ने उन्हें सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी












