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ट्रांसजेंडर बिल पर बवाल! सुप्रीम कोर्ट कमेटी ने सरकार से वापस लेने को कहा

संसद से पास हुए ट्रांसजेंडर बिल 2026 पर अब नया विवाद खड़ा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक कमेटी ने केंद्र सरकार से इस कानून को वापस लेने की मांग कर दी है।

ऐसे में अब सवाल ये है कि आखिर इस बिल में ऐसा क्या है, जिस पर इतनी आपत्ति जताई जा रही है? आइए समझते हैं पूरा मामला।


⚖️ सुप्रीम कोर्ट कमेटी ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट की कमेटी, जिसकी अध्यक्षता रिटायर्ड जज आशा मेनन कर रही हैं, ने सरकार को पत्र लिखकर चिंता जताई है।

कमेटी का कहना है कि:

  • कानून में कई अहम बदलाव किए गए हैं
  • ये बदलाव ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं
  • इसलिए इस पर दोबारा विचार जरूरी है

🚫 सेल्फ आइडेंटिफिकेशन हटाने पर विवाद

सबसे बड़ा मुद्दा है सेल्फ आइडेंटिफिकेशन (खुद की पहचान) को हटाना।

पहले क्या था?

  • व्यक्ति खुद अपनी जेंडर पहचान तय कर सकता था
  • सर्जरी या मेडिकल प्रूफ की जरूरत नहीं थी

अब क्या बदला?

  • पहचान को मेडिकल या जैविक आधार से जोड़ा गया
  • बिना सर्जरी या तय मानकों के पहचान मुश्किल हो सकती है

👉 ऐसे में कई ट्रांसजेंडर लोगों को सरकारी योजनाओं और दस्तावेजों तक पहुंच में परेशानी हो सकती है।


🏥 मेडिकल सर्टिफिकेट और प्राइवेसी चिंता

कमेटी ने गोपनीयता (Privacy) को लेकर भी चिंता जताई है।

नए कानून के तहत:

  • जेंडर बदलने की सर्जरी की जानकारी सरकारी अधिकारियों को देनी पड़ सकती है
  • जिला मजिस्ट्रेट मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पहचान प्रमाण पत्र जारी करेंगे

👉 इससे निजी मेडिकल जानकारी के लीक होने का खतरा बढ़ सकता है।


⚠️ नए दंड प्रावधानों पर सवाल

कमेटी ने यह भी कहा कि:

  • कई अपराध पहले से ही मौजूदा कानून में शामिल हैं
  • फिर नए दंड प्रावधान जोड़ने की जरूरत क्यों?

हालांकि, नए बिल में:

  • जबरन पहचान बदलवाने
  • अपहरण और शोषण जैसे अपराधों पर सख्त सजा का प्रावधान किया गया है

📜 सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले से टकराव?

कमेटी का मानना है कि यह कानून 2014 के ऐतिहासिक NALSA फैसले के खिलाफ जा सकता है।

👉 उस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हर व्यक्ति को अपनी जेंडर पहचान खुद तय करने का अधिकार है।

ऐसे में नए नियम उस अधिकार को सीमित कर सकते हैं।


🧑‍⚖️ कमेटी क्यों बनाई गई थी?

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने यह कमेटी एक मामले की सुनवाई के दौरान बनाई थी।

मामला था:

  • एक ट्रांसजेंडर शिक्षक के साथ भेदभाव

कोर्ट ने कमेटी को निर्देश दिया था कि:

  • रोजगार, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाओं में आने वाली समस्याओं का अध्ययन करे
  • और सुधार के सुझाव दे

🧾 निष्कर्ष

कुल मिलाकर, ट्रांसजेंडर बिल 2026 पर उठे सवाल यह दिखाते हैं कि यह मुद्दा बेहद संवेदनशील है।

अब देखना यह होगा कि सरकार इस पर क्या फैसला लेती है—क्या कानून में बदलाव होगा या विवाद और बढ़ेगा।

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