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20 साल, हजारों करोड़ खर्च… फिर भी यमुना साफ क्यों नहीं?

दिल्ली में यमुना को साफ करने का सपना अब भी अधूरा नजर आ रहा है।
दरअसल, हजारों करोड़ खर्च करने के बाद भी नदी में गंदा पानी बहना बंद नहीं हुआ है।

अब एक नई रिपोर्ट ने इस पूरे प्रोजेक्ट पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


क्या कहती है रिपोर्ट?

Delhi Jal Board के इंटरसेप्टर सीवेज प्रोजेक्ट को लेकर जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

  • DJB ने दावा किया था कि 238 MGD सीवेज रोका गया
  • लेकिन असल में सिर्फ 142 MGD ही रोका जा सका
  • यानी करीब 40% गंदा पानी अब भी यमुना में जा रहा है

Delhi Pollution Control Committee की रिपोर्ट के मुताबिक, 117 MGD से ज्यादा गंदा पानी अभी भी सीधे नदी में बह रहा है।


प्रोजेक्ट में कहां हुई चूक?

अब सवाल ये है कि इतनी बड़ी योजना के बावजूद नतीजे क्यों नहीं मिले?

जांच में कई बड़ी खामियां सामने आईं:

  • 109 इंटरसेप्टर पॉइंट में से सिर्फ 56 ही ठीक से काम कर रहे
  • कई जगह सीवेज ओवरफ्लो हो रहा है
  • 5 जगहों पर जांच ही नहीं हो सकी

मॉनिटरिंग सिस्टम भी फेल

दरअसल, निगरानी व्यवस्था भी बेहद कमजोर पाई गई।

  • 12 में से 4 फ्लो मीटर खराब
  • 23 में से सिर्फ 8 CCTV कैमरे चालू
  • पंपिंग क्षमता का दावा भी बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया

ऐसे में साफ है कि जमीन पर हालात और कागजों में आंकड़ों में बड़ा अंतर है।


क्या था इंटरसेप्टर सीवेज प्रोजेक्ट?

यह प्रोजेक्ट 2006 में शुरू किया गया था, जिसका मकसद था:

  • छोटे नालों का गंदा पानी रोकना
  • उसे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) तक पहुंचाना
  • साफ पानी को यमुना में छोड़ना

इस योजना में तीन बड़े नालों—नजफगढ़, शाहदरा और सप्लीमेंट्री ड्रेन—को टारगेट किया गया था।


देरी और बढ़ती समस्या

जानिए, यह प्रोजेक्ट पहले 2015 तक पूरा होना था।

लेकिन:

  • काम में 10 साल से ज्यादा की देरी हुई
  • अनधिकृत कॉलोनियों के बढ़ने से सीवेज और बढ़ गया
  • योजना पुराने आंकड़ों पर आधारित रही

पर्यावरण कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह पूरी योजना प्लानिंग की कमी का शिकार रही।


सरकार का दावा बनाम हकीकत

दिल्ली सरकार ने पहले दावा किया था कि प्रोजेक्ट पूरा हो चुका है।

लेकिन नई जांच रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया कि:

  • जमीनी हकीकत अलग है
  • कई हिस्सों में काम अधूरा या बेअसर है

निष्कर्ष: सुधार की जरूरत, नहीं तो बढ़ेगी समस्या

यमुना को साफ करने के लिए सिर्फ बड़े बजट नहीं, सही योजना और निगरानी भी जरूरी है।

ऐसे में अब सवाल यह है कि क्या इस प्रोजेक्ट को सुधारकर सही दिशा दी जाएगी या फिर यह भी कागजों तक सीमित रह जाएगा।


FAQ

Q1. इंटरसेप्टर सीवेज प्रोजेक्ट क्या है?
यह एक योजना है जिसका उद्देश्य नालों का गंदा पानी रोककर उसे ट्रीटमेंट के बाद यमुना में छोड़ना है।

Q2. इस प्रोजेक्ट में क्या कमी पाई गई?
रिपोर्ट के मुताबिक, केवल 60% सीवेज ही रोका गया, बाकी अब भी नदी में जा रहा है।

Q3. यमुना प्रदूषण का मुख्य कारण क्या है?
अनट्रीटेड सीवेज और कमजोर मॉनिटरिंग सिस्टम इसकी बड़ी वजह हैं।

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