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‘राजनीतिक नोटबंदी’ बन सकता है डिलिमिटेशन, थरूर का बड़ा हमला

देश में डिलिमिटेशन को लेकर बहस तेज होती जा रही है।
दरअसल, कांग्रेस नेता Shashi Tharoor ने इसे “राजनीतिक नोटबंदी” बताते हुए गंभीर चिंता जताई है।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इसे जल्दबाजी में लागू किया गया, तो इसका असर देश के संघीय ढांचे पर पड़ सकता है।


क्या है थरूर की बड़ी चिंता?

लोकसभा में चर्चा के दौरान थरूर ने साफ कहा कि यह प्रक्रिया कई राज्यों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।

उनके मुताबिक:

  • छोटे राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है
  • ज्यादा आबादी वाले राज्यों को फायदा मिलेगा
  • इससे “जनसंख्या बहुमत का दबाव” बढ़ सकता है

ऐसे में अब सवाल ये है कि क्या डिलिमिटेशन संतुलन बिगाड़ सकता है?


‘अच्छा शासन करने वाले राज्य होंगे कमजोर’

थरूर ने एक अहम मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा कि जिन राज्यों ने:

  • जनसंख्या नियंत्रण पर काम किया
  • विकास और शिक्षा में निवेश किया

उन्हें इस प्रक्रिया में नुकसान हो सकता है, जबकि ज्यादा जनसंख्या बढ़ाने वाले राज्यों को फायदा मिलेगा।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह सही संदेश है कि अच्छा शासन करने वाले राज्य राजनीतिक रूप से कमजोर हो जाएं?


महिलाओं के आरक्षण से जोड़ने पर भी सवाल

थरूर ने महिला आरक्षण बिल को डिलिमिटेशन से जोड़ने पर भी आपत्ति जताई।

उनका कहना था:

  • इससे महिलाओं की उम्मीदों को “बंधक” बनाया जा रहा है
  • यह एक जरूरी सामाजिक सुधार है, जिसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए

उन्होंने मांग की कि अगला चुनाव मौजूदा सीटों के आधार पर ही कराया जाए।


अमित शाह के आश्वासन पर भी संदेह

थरूर ने गृह मंत्री Amit Shah के उस बयान पर भी सवाल उठाए, जिसमें दक्षिणी राज्यों की सीटें बढ़ाने की बात कही गई थी।

उनके अनुसार:

  • यह सिर्फ राजनीतिक आश्वासन है
  • इसे कानून या संविधान में पक्का नहीं किया गया
  • भविष्य में इसे बदला जा सकता है

लोकसभा सीट बढ़ाने पर क्या बोले?

थरूर ने लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने पर भी चिंता जताई।

उन्होंने कहा कि:

  • इससे संसद को संभालना मुश्किल हो सकता है
  • राज्यसभा की भूमिका कमजोर पड़ सकती है

अंतरराष्ट्रीय मॉडल से सीखने की सलाह

थरूर ने सुझाव दिया कि भारत को अन्य देशों से सीख लेनी चाहिए।

उन्होंने उदाहरण दिए:

  • अमेरिका का “कनेक्टिकट समझौता”
  • यूरोपियन यूनियन का संतुलित प्रतिनिधित्व मॉडल

इनसे प्रेरणा लेकर संतुलित समाधान निकाला जा सकता है।


निष्कर्ष: सोच-समझकर लेना होगा फैसला

डिलिमिटेशन एक जरूरी प्रक्रिया है, लेकिन इसका असर देश की राजनीति और संघीय ढांचे पर गहरा पड़ सकता है।

ऐसे में जरूरी है कि इसे जल्दबाजी में लागू करने के बजाय व्यापक चर्चा और सहमति के बाद ही आगे बढ़ाया जाए।


FAQ

Q1. डिलिमिटेशन क्या है?
यह प्रक्रिया है जिसमें जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों का पुनर्निर्धारण किया जाता है।

Q2. शशि थरूर ने इसे विवादित क्यों बताया?
उन्होंने कहा कि इससे छोटे राज्यों को नुकसान और बड़े राज्यों को ज्यादा राजनीतिक ताकत मिल सकती है।

Q3. महिला आरक्षण बिल से इसका क्या संबंध है?
सरकार ने इसे डिलिमिटेशन से जोड़ा है, जिस पर थरूर ने आपत्ति जताई है।

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